पंचाम्रित – 2024 मई 7

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।। पंचाम्रित ।।

(संस्कृत में पंच का अर्थ पाँच होता है। अम्रित अच्छी है)

आज (2024 मई 7) अमावास्या है और आपके समक्ष ‘पंचाम्रित’!

1. गर्मी में पिघल गए ‘अंकुर’।

विवेकानंद विद्यालय, चेंगलपट्टू के 4 शिक्षकों और 4 छात्र-छात्राओं ने गर्मी से निपटने के लिए चेंगलपट्टू बस स्टैंड के पास सड़क किनारे विक्रेताओं को 30 बाय 8 आकार का बड़ा छाता दिया। छाते पाने वाले सभी 20 व्यापारी बहुत खुश हुए और छात्रों को आशीर्वाद दिया।

स्रोत : विजयभारतम तमिल साप्ताहिक

 

 

 

 2 गांव एकजुट हुआ, शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा।

रामनाथपुरम जिले के मुदुकुलथूर के पास मीसल गांव में 300 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां शराब और नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं के कारण समय-समय पर कानून और व्यवस्था की समस्याएं उत्पन्न होती थीं। महिलाएं और बच्चे दहशत में थे। गांव वालों ने इकट्ठा होकर, ”गांव में शराब और नशीली दवाओं का सेवन प्रतिबंधित है“ कर के एक प्रस्ताव पारित की। वे बोले –  “अगर कोई उल्लंघन किया तो पुलिस में शिकायत दर्ज करायी जायेगी”। इस संबंध में मीसल बस पड़ाव के पास एक नोटिस बोर्ड भी लगाया गया है। “गांव के अंदर नशीली दवाएं नहीं बेची जानी चाहिए और अगर मीसल गांव से गुजरने वाले लोग शराब पीते हैं तो भी कार्रवाई की जाएगी” गांव के लोग कहते। मीसल के ग्रामीणों ने पिछले छह महीनों से शराब और नशीली दवाओं पर प्रतिबंध का पालन किया है, जो अन्य गांवों के लिए एक उदाहरण है। सरकारी अधिकारी भी मीसल के ग्रामीणों की सराहना कर रहे हैं। संकल्प के बाद इस शहर में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गयी है। अब उस गांव की महिलाएं भय रहित हैं।

स्रोत: डेलीहंट एबीपी नाडु

3. यह है सनातन धर्म।

जब डॉ. अब्दुल कलाम राष्ट्रपति थे, तो जगद्गुरु श्री जयेंद्र सरस्वती स्वामी (कांजी शंकराचार्य) ने राष्ट्रपति भवन का दौरा किया; तब की घटना:

“जैसा कि राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम संत (जगतगुरु श्री जयेंद्र सरस्वती) को उचित सम्मान देना चाहते थे, उन्होंने मुझे अपने कार्यालय में बुलाया और मुझसे राष्ट्रपति भवन के पारंपरिक लोकाचार के बारे में पूछा। मैंने उनसे कहा, “मैं राष्ट्रपति भवन के प्रांगण पर स्वामिजी का स्वागत करूंगा और उनके सात अंदर आऊंगा।” कुछ मिनटों के गहन विचार के बाद, उन्होंने मुझसे पूछा: “यदि मैं स्वामिजी का स्वागत करूँ तो क्या होगा?” मैंने कहा, “सर, वह एक राष्ट्रपति से ज़्यादा एक सन्यासी होना”। वे मुस्करा उठे। लेकिन कुछ नहीं कहा गया. फिर हम ऑफिस में गये. “सर, मैं उन्हें यहां लाऊंगा, यह आगंतुक आसन पर उसकी बाघ की खाल वाली सीट को सोफे पर रखेगा और वे उस पर बैठेंगे। राष्ट्रपति अपने सोफा कुर्सी पर बैठे रहेंगे।” उसने मुझसे दूसरी बार पूछा: “अगर मैं उन्हें अपनी सोफ़ा कुर्सी पर बैठाऊं तो क्या होगा?” मैंने उत्तर दिया: “सर, यह संत को राष्ट्रपति से अधिक सम्मान देना होगा”। तीस मिनट के बाद, मैंने देखा कि प्रांगण पर अब्दुल कलाम सर मेरे पीछे माला हाथ में लिये खड़े थे। तुरंत मैं उनके पीछे जाकर खडा हुआ। स्वामीजी को हम स्वागत कर राष्ट्रपति भवन के कक्ष से होकर गुजरे। कलाम सर ने बाघ की खाल राष्ट्रपति की सीट पर फैलाने के लिए कहा। उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे कहा, “भारत के राष्ट्रपति की सीट को संत की आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद मिलना चाहिए, और जो भी इसके बाद यहां बैठेगा उसे आध्यात्मिक आशीर्वाद मिलना चाहिए।” मुझे उनकी बातें बहुत अच्छी लगीं और उनसे मैंने कहा, “सर, आप न केवल एक महान वैज्ञानिक हैं, बल्कि एक संत भी हैं।” डॉ.कलाम हमेशा की तरह अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराये”।

सौजन्य: लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक गिन्नी, एसएम, वीएसएम (राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के एडीसी)।

श्रेय: डॉ. प्रेमा लक्ष्मीनारायण @GEEMS71 की X (ट्विटर) पोस्ट; 4 मई 2024.

4. मोहिनी के अच्छे काम से स्वच्छ है देश।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को सुबह-सुबह कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी पहुंचे और अन्कोला शहर के बस स्टैंड पर फल विक्रेता मोहिनी गौड़ा से मुलाकात की। स्वच्छ भारत योजना के लिए मोहिनी के द्वारा किए जा रहे अच्छे काम को जानकर उनकी सराहना की। मोहिनी गौड़ा पत्तों में लपेटकर फल बेचती हैं। अगर कोई फल खाने के बाद पत्तियां सड़क पर फेंक देता है तो मोहिनी उन्हें उठाकर कूड़ेदान में डाल देती है। उन्होंने अपनी इसी खूबी से अपनी एक अनोखी पहचान बनाई है। पीएम के मुलाकात की खबर सोशल मीडिया सेसब जगह फ़ैली और मोहिनी के काम को सुदूर प्रसिद्धि मिली है। एक ब्लॉगर एक्स (ट्विटर पर) ने लिखा, “पीएम मोदी के स्वच्छ भारत आंदोलन में जन भागीदारी के ऐसे उदाहरण दूसरों को प्रेरित करेंगे।”

स्रोत: वेबसाइट Mangalorean.com”

 

 

 5. विवेकानन्द के मार्गदर्शन में वे आईएएस बने

तिरुप्पूर के इडुवमपालयम की रहने वाली धारणी ने यूपीएससी परीक्षा में 250वीं रैंक हासिल की और आईएएस बन गईं। डेंटल ग्रेजुएट धारणी ने छह महीने की क्लिनिकल प्रैक्टिस के बाद यूपीएससी की तैयारी में 4 साल बिताए (मां स्कूल टीचर, पिता कपड़ा व्यवसायी)। धारणी का कहना है कि अपनी छोटी बहन को छह महीने तक NEET की तैयारी करते और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेते देखकर उनकी आईएएस में रुचि हो गई। “कई आईएएस अधिकारियों के मार्गदर्शन मिला। स्वामी विवेकानन्द कहते हैं, ”एक विचार लें और उसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लें।” यही मेरे लिये निरंतर मार्गदर्शन”, धारणी बोली।

स्रोत: ईटीवी भारत ।

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