चिंतक, विचारक, हिन्दुत्व के भाष्यकार, वरिष्ठ पत्रकार मा. गो. वैद्य जी का निधन

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नागपुर. वरिष्ठ पत्रकार, हिन्दुत्व के भाष्यकार, चिंतक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक माधव गोविंद वैद्य (बाबू राव वैद्य) जी का आज सायं 3.35 बजे निधन हो गया. वे 97 वर्ष के थे. वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे, और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था. कल प्रातः नागपुर (अंबाझरी घाट पर) में उनका अंतिम संस्कार होगा.

महाराष्ट्र के वर्धा जिले की तरोड़ा तहसील में 11 मार्च, 1923 को जन्मे वैद्य जी के बारे में कहा जा सकता है कि जीवन में कुछ भी उन्हें सरलता से नहीं मिला, किंतु जो भी मिला उसे उन्होंने बेहद सहजता से लिया.

प्रारंभिक शिक्षा तरोडा व माध्यमिक शिक्षा नील सिटी हायस्कूल, नागपुर से पूर्ण की. नागपुर के मॉरिस कॉलेज से महाविद्यालयी शिक्षा (बी.ए. एम.ए.) प्रथम श्रेणी में पूरी की और शिक्षण कार्य से जुड़ गए.

संस्कृत के ख्यात शिक्षक जो अनूठी शिक्षण शैली और विषय पर पकड़ के कारण न केवल छात्रों, अपितु विरोधी विचारधारा के लोगों में भी लोकप्रिय रहे. वर्ष 1966 में संघ योजना से नौकरी छोड़ दैनिक तरुण भारत, नागपुर से जुड़े. समाचार चयन की तीक्ष्णदृष्टि और गहरी वैचारिक स्पष्टता के कारण इस क्षेत्र में भी प्रतिभा को प्रमाणिक किया. कालांतर में इसका प्रकाशन करने वाले नरकेसरी प्रकाशन का नेतृत्व किया. आगे चलकर पत्रकारिता से राजनीति में जाने का संयोग बना. 1978 से 1984 तक महाराष्ट्र विधान परिषद् में मनोनीत किये गए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, अखिल भारतीय प्रवक्ता, तथा वर्ष 2008 तक अ. भा. कार्यकारी मंडल के निमन्त्रित सदस्य रहे. मा.गो. वैद्य संघ शोधकों, सत्यशोधकों और विरोधी विचारधाराओं के जिज्ञासा समाधान के लिए तत्पर और उपलब्ध रहे.

उन्होंने वैचारिक अधिष्ठान प्रदान करने वाली अनेक पुस्तकों का लेखन किया. उन्हें महाराष्ट्र सरकार का ‘महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’, राष्ट्रसन्त तुकडोजी महाराज नागपुर विश्‍वविद्यालय का ‘राष्ट्रसन्त तुकडोजी जीवन गौरव पुरस्कार’ सहित दर्जन भर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.

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